श्री कृष्ण (Shee Krishna) का जन्म भादो की अष्टमी अंधेरी और तूफानी आधी रात को Mathura जेल मै कंस मामा के यहां हुआ था। जिसने अपनी बहन और बहनोई को Mathura जेल में डाल दिया था, लेकिन जब krishna ने जन्म लिया तभी अचानक से एक आकाश से आवाज आयी और तभी कई अद्भुत चम्तकार हुये,

चौपाई- विधिना बिन राखे नहि कोई । करम लिखा सोई फल दोई ।।
कर जोरे तब देवकी कहै । नन्द मित्र गोकुल में रहै ।।
पीर यशोदा हरै हमारी । नारी रोहिणी यहाँ तिहारी ।।
कर जोरे तब देवकी कहै । नन्द मित्र गोकुल में रहै ।।
पीर यशोदा हरै हमारी । नारी रोहिणी यहाँ तिहारी ।।
इस बालक को यहाँ ले जाओ, यों सुन वसुदेव अकुला कर कहने लगे'इस कठिन बंधनसे कैसे निकलू इतना कहते सब बेडी-हथकडी खुल गयी , चारो और के गेट खुल गये ।
पहरे दार सो गये, तभी वसुदेवजीने भगवान Sheer Krishan को सूपमेँ रख शिर पर रख लिया और झट'-पट ही गोकुल को लेकर चल दिए, और रास्ते मै यमुना मिली और यमुना मेरे Shree Krishan को देख कर खुश हो जाती है और जोर जोर पानी की लहरे आने लग जाती है ऐसा देख वासुदेव भगवान का ध्यान धर आगे यमुना मेँ धँसे ज्यों-ज्यों बढते जाते थे त्यों-त्यो नदी बढती जाती हें थी जब नाक तक पानी आगया तब तो ये निपट घबराये, इनको व्याकुल देख Shee Krishan ने अपना पॉव बढाया और हुँकार दिया, चरण छूते ही यमुना थम गयी,
और वसुदेव यमुना पार नन्द बाबा के घर पहुचे, वहां गेट खुले मिलते पाये और बासुदेव जी देखते है सब सोये पड़े है और देबताओ ने मोहिनी डाली थी कि यशोदा को लडकी होने की सुध नहीँ थी। वसुदेवजी Shee Krishan लाला को यशोदा मैया के पास सुला दिया,
और कन्या को लेकर चट पट अपना पन्थ लिया नदी उतर फिर आये वहाँ देवकी बैठो सोचती थी। जब कन्या लाय वहॉ की कुशल कही तो सुनते ही प्रसन्न हो बोली, है स्वामी वैसे कंस अब मार भी डालें तो भी कुछ चिन्ता नहीं क्योकिं उस दुष्ट के हाथसे पुत्र तो बचा बासुदेव जी आते ही दोनो ने अपनी-अपनी हथकडियाँ पहन ली । कन्या रो उठी, रोने की ध्वनि सुन पहरे दर जागे तो अपने-अपने शस्त्र लै सावधान होने लगे, इसी तरह मेरे Kanha Mathura नगरी से Gokul तक पहुंचे |
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